अल-फलाह यूनिवर्सिटी PMLA के तहत कुर्क करने की तैयारी
415.10 करोड़ की काली कमाई का पहले ही हो चुका है खुलासा

Satyakhabar, Haryana
हरियाणा के फरीदाबाद में स्थित अल-फलाह यूनिवर्सिटी के दिन समय इन दिनों ठीक नहीं चल रहे हैं। इसका नाम पहले लाल किला ब्लास्ट मामले से जुड़ा और अब ED इस शिक्षण संस्थान के खिलाफ सख्त एक्शन लेने की तैयारी में है। यह यूनिवर्सिटी कथित ‘व्हाइट कॉलर टेरर मॉड्यूल’ के केंद्र के तौर पर सामने आया है। प्रवर्तन निदेशालय (ED) यूनिवर्सिटी परिसर को मनी लॉन्ड्रिंग रोधी कानून (PMLA) के तहत कुर्क करने की तैयारी कर रहा है।
जांच एजेंसी को संदेह है कि विश्वविद्यालय की कई इमारतों के निर्माण में अपराध से अर्जित आय यानी अवैध धन का इस्तेमाल किया गया। ED की जांच में सामने आया है कि फरीदाबाद के धौज इलाके में स्थित अल-फलाह विश्वविद्यालय के भवनों के निर्माण में जिन फंड्स का उपयोग हुआ, वे कथित तौर पर अपराध से अर्जित आय का हिस्सा हो सकते हैं। इसी आधार पर एजेंसी संपत्ति कुर्क करने की कार्रवाई पर विचार कर रही है। यदि यह कार्रवाई होती है, तो यह अल-फलाह विश्वविद्यालय और उससे जुड़े ट्रस्ट के लिए बड़ा झटका माना जाएगा।

इसी यूनिवर्सिटी से जुड़े डॉ. उमर नबी ने सुसाइड बॉम्बर बनकर दिल्ली के लाल इलाके के बाहर ब्लास्ट को अंजाम दिया था, जिसमें 15 लोगों की मौत हुई थी। इस आतंकी हमले के बाद जांच एजेंसियों ने यूनिवर्सिटी को आतंकी मॉड्यूल का केंद्र मानते हुए जांच तेज कर दी है। इसी यूनिवर्सिटी से जुड़े डॉ. उमर नबी ने सुसाइड बॉम्बर बनकर दिल्ली के लाल इलाके के बाहर ब्लास्ट को अंजाम दिया था। दिल्ली ब्लास्ट और आतंकी मॉड्यूल केस में नेशनल जांच एजेंसी (NIA) ने दो अन्य डॉक्टरों शाहीन सईद और डॉ. मुजम्मिल को गिरफ्तार किया। डॉ. मुजम्मिल पर ब्लास्ट के लिए विस्फोटक एकत्रित करने और डॉ. शाहीन सईद पर आर्थिक रूप से मदद करने का आरोप है। जांच एजेंसी ने इन दोनों के अलावा दूसरे कई कर्मचारियों को भी गिरफ्तार किया है।
चेयरमैन पहले ही हो चुका है गिरफ्तार
इस मामले में अल-फलाह समूह के चेयरमैन जवाद अहमद सिद्दीकी को ED ने पिछले साल नवंबर में गिरफ्तार किया था। सिद्दीकी पर मनी लॉन्ड्रिंग के गंभीर आरोप लगाए गए हैं। ED का दावा है कि अल-फलाह ट्रस्ट की ओर से ऑपरेट कई शिक्षण संस्थानों ने छात्रों के साथ कथित तौर पर धोखाधड़ी की। इन संस्थानों के पास शिक्षा प्रदान करने के लिए आवश्यक वैध मान्यता नहीं थी, इसके बावजूद छात्रों से फीस वसूली गई। ED की जांच में यह भी सामने आया है कि छात्रों से एकत्र की गई रकम का इस्तेमाल कथित तौर पर अन्य गतिविधियों और संपत्तियों के निर्माण में किया गया, जो PMLA के तहत अपराध की श्रेणी में आता है। इसी आधार पर अब विश्वविद्यालय परिसर को कुर्क करने की प्रक्रिया को आगे बढ़ाया जा सकता है।

पैसा जुटाने की जांच कर रही ईडी
प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) अल-फलाह यूनिवर्सिटी में इस बात की जांच कर रही है कि यूनिवर्सिटी के निमार्ण में जो पैसा लगा है, वह प्रोसीड्स ऑफ क्राइम से तो नही जुटाया गया है। ईडी ने यूनिवर्सिटी के चेयरमैन जवाद अहमद सिद्दीकी को दिल्ली ब्लास्ट के बाद गिरफ्तार कर लिया था। ईडी ने अपनी जांच में पाया है कि अल-फलाह यूनिवर्सिटी ने खुद को यूजीसी मान्यता प्राप्त बताकर और एनएएसी मान्यता को लेकर गलत दावे कर छात्रों को गुमराह किया। यूनिवर्सिटी के पास मान्यता नही थी लेकिन उसके बाद भी स्टूडेंट का यहां पर पढ़ाया जा रहा था।
अंतिम आदेश की पुष्टि नहीं
फिलहाल ED की ओर से आधिकारिक तौर पर कुर्की की तारीख या अंतिम आदेश की पुष्टि नहीं की गई है, लेकिन सूत्रों का कहना है कि जांच अंतिम चरण में है। यदि कुर्की होती है, तो इसका असर विश्वविद्यालय के संचालन, छात्रों और कर्मचारियों पर भी पड़ सकता है. मामले पर अल फलाह विश्वविद्यालय या ट्रस्ट की ओर से अब तक कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया सामने नहीं आई है।
415.10 करोड़ की काली कमाई
ईडी कोर्ट को बता चुकी है कि चेयरमैन जवाद अहमद सिद्दीकी ने यूनिवर्सिटी के ट्रस्ट के नाम पर विदेशों से फंडिंग ली है। यहां पर पढ़ने वाले स्टूडेंट और उनके परिजनों का झूठी मान्यता का हवाला देकर उनसे गलत तरीके से मोटी फीस वसूली गई है। इसी तरीको ने यूनिवर्सिटी के ट्रस्ट ने 415.10 करोड़ की कमाई की है। ED को जांच के दौरान कई अनियमितताएं मिलीं। जिसमें 9 शेल कंपनियां एक ही पते पर रजिस्टर्ड पाई गईं। कई कंपनियों में एक ही मोबाइल नंबर है। साथ ही EPFO का भी कोई रिकॉर्ड नहीं मिला। फिलहाल ईडी और एनआईए दोनों एजेंसियां मामले की गहन जांच कर रही हैं और आने वाले दिनों में अल-फलाह यूनिवर्सिटी के खिलाफ कार्रवाई और तेज होने की संभावना है।
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